*सतगुरु कृपा रामलीला में जटायु उद्धार से लंका दहन तक की लीला 18 अक्टूबर को संपन्न हुई*
अंबेडकर नगर। एक सौ बाइस वर्ष पुरानी कस्बा शहजादपुर की ऐतिहासिक रामलीला में दिनांक 18 अक्टूबर को महात्मा जटायु अपनी पुत्री समान जानकी जी को रावण से मुक्त कराने के लिए प्राण की परवाह किए बिना बहुत ही भीषण संग्राम किया। परंतु महाबली रावण के प्रहार से घायल अवस्था में धराशाई होते हुए भी प्रभु के आने की प्रतीक्षा में अपने प्राण को रोके रखते हैं, और प्रभु के आते ही सारा वृत्तांत सुनाकर प्रभु के सम्मुख सद्गति को प्राप्त करते हैं। श्री राम अपने अनुज लक्ष्मण सहित पितातुल्य गिद्धराज जटायु का अंतिम संस्कार करते हैं। आगे की लीला में प्रभु श्री राम का अपने अनन्य भक्त माता शबरी से मुलाकात होती है, जिसके द्वारा उन्हें वानर सेना के प्रमुख सुग्रीव जी से मिलने का मार्ग मिलता है। प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त श्री हनुमान जी द्वारा श्री सुग्रीव जी और प्रभु श्री राम की मित्रता कराई जाती है। वहीं पर प्रभु श्री राम को माता जानकी के बारे में भी महाराज सुग्रीव द्वारा कुछ संकेत चिह्न भी मिलते हैं। इसके बाद सुग्रीव की करुण कथा सुनने के बाद भगवान श्री राम ने दुरात्मा बालि का वध करने का प्रण करते हैं, पुनः सुग्रीव अपने भाई बालि को युद्ध के लिए ललकारते हैं और दोनों में बहुत ही भीषण संग्राम मंच पर दिखाया जाता है जिसमें दोनों वीरों में कोई किसी से काम नहीं दिखाई दे रहा था अंत में प्रभु श्री राम ने अपने अमोघ बाण से बालि का वध करके सद्गति प्रदान करते है। श्री लक्ष्मण जी द्वारा सुग्रीव को किष्किंधा का राजा और अंगद को युवराज घोषित किया जाता है। वर्षा ऋतु बीत जाने के पश्चात समस्त वानर सेना और सेनानायक माता जानकी की खोज में चारों दिशाओं में महाराज सुग्रीव के आदेश से निकल पड़ते हैं अंत में श्री हनुमान जी, रीक्षराज जामवंत, युवराज अंगद और कुछ प्रमुख सेनापति माता सीता जी की खोज में दक्षिण दिशा को प्रस्थान करते हैं। इन सभी वानर सेना और सेनापतियों में श्री हनुमान जी लंका नगरी में पहुंचकर, माता जानकी का पता लगाकर, वहां पर पूरी तरह से तांडव मचाते हुए स्वर्ण लंका को अग्नि में तहस-नहस कर दिया। पुनः अशोक वाटिका में पहुंचकर माता जानकी से आशीर्वाद और निशानी स्वरूप चूड़ामणि लेकर वापस अपने प्रभु श्री राम के चरणों में उपस्थित होकर वहां का सारा वृत्तांत सुनाते हैं। रामलीला प्रांगण में उपस्थित सभी लोगों ने देर रात तक लीला का पूर्ण रसास्वादन लिया।
इस प्रकार की समस्त लीलाओं का सजीव रूप देने के लिए जिन जिन लोगों ने भूमिका निभाई है उनमें अखिलेश दुबे ने अंगद, जानकीदास ने लंकिनी ,राजन ने सीता, रामलाल ने सुरसा, अजीत दुबे ने श्री राम, सुमित शर्मा ने लक्ष्मण, अमरजीत ने बालि, श्री शीतल सिंह ने सुग्रीव, विशाल कुमार मेहरोत्रा ने रावण, अशोक कुमार पांडे ने अक्षय कुमार, पुनीत मेहरोत्रा ने इंद्रजीत, विक्रम दुबे ने महाबली हनुमान, चक्रधारी दुबे ने जटायू, सत्यम मेहरोत्रा ने जामवंत, शिवम मेहरोत्रा ने विभीषण तथा कई अन्य कलाकारों ने अपनी अपनी भूमिकाओं का प्रशंसनीय प्रदर्शन किया।
आज 19 अक्टूबर को अंगद रावण संवाद मेघनाथ और कुंभकरण वध की लीला दिखाई जाएगी।
साभार -
अवधेश कुमार मेहरोत्रा निर्देशक - श्री सतगुरु कृपा रामलीला समिति शहजादपुर

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