*सतगुरु कृपा रामलीला में पुष्प वाटिका और धनुष यज्ञ लीला का हुआ मंचन*
अंबेडकर नगर। 16 अक्टूबर 2026 एक सौ बाइस वर्ष पुरानी कस्बा शहजादपुर की ऐतिहासिक रामलीला में दिनांक 16 अक्टूबर को चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ के राज्यसभा में उपस्थित महाराज दशरथ, गुरुदेव वशिष्ठ, मंत्री सुमन्त व अन्य मंत्रियों की उपस्थिति से प्रारंभ होती है। महाराज दशरथ अपनी वृद्धावस्था को देखते हुए गुरुदेव वशिष्ठ से इस बात का प्रस्ताव रखते हैं कि अब मुझे सन्यास आश्रम के नियमों का पालन करते हुए अपने ज्येष्ठ पुत्र राम को अयोध्या का राजा घोषित कर देना चाहिए, गुरुदेव की सहमति मिलते ही पूरी अयोध्या में बड़ी धूमधाम से प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक की तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं । इसी बीच देवताओं के आग्रह से मां सरस्वती के प्रभाव से दासी मंथरा की बुद्धि भ्रमित हो जाती है, जिससे वह कुचाल करना प्रारंभ कर देती है और कैकेई को राजा से दो वरदान, एक से भरत का राज्याभिषेक और दूसरे से राम को 14 वर्षों का वनवास मंगवाने के लिए तैयार कर लेती है, जिसका बड़ा ही सुंदर और मार्मिक मंचन कलाकारों ने रंगमंच पर प्रदर्शित किया। इसके बाद कोपभवन के दृश्य में महाराज दशरथ और कैकेई के संवाद को देखकर रामलीला प्रांगण में उपस्थित लगभग सभी लोगों के हृदय में कैकेई के प्रति घृणा और महाराज दशरथ के संवाद से अश्रुधारा बहने लगी। मंचन के आखिरी दृश्य में प्रभु श्री राम अपने अनुज लक्ष्मण और भार्या जानकी सहित अपने माता-पिता और नगर वासियों से विदा होकर वनवास के लिए प्रस्थान करते हैं जो कि बहुत ही हृदय विदारक दृश्य रहा।
इस प्रकार की समस्त लीलाओं का संजीव रूप देने के लिए जिन जिन लोगों ने भूमिका निभाई है उनमें अखिलेश दुबे ने वशिष्ठ, अवधेश कुमार मेहरोत्रा ने महाराज दशरथ, जानकीदास ने कैकेई ,राजन ने सीता अजीत दुबे ने श्री राम, सुमित शर्मा ने लक्ष्मण, अमरजीत ने सुमंत, राजू ने कौशल्या, रामलाल ने सुमित्रा, सहित कई नगर वासियों में विशाल कुमार मेहरोत्रा,विक्रम दुबे, चक्रधारी दुबे, अशोक कुमार पांडे, व अन्य कलाकारों ने अपनी अपनी भूमिकाओं का प्रशंसनीय प्रदर्शन किया।

0 Comments