*हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर संगोष्ठी,सम्मान समारोह व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का हुआ आयोजन*
निराला साहित्य संवाद,
अयोध्या। वैश्विक मजबूरियां आवश्यकताएँ ही हिंदी को विश्व की संपर्क भाषा बनाएंगी,मातृभाषा से ही हमारे देश की अस्मिता की पहचान है,हिंदी के बिना संपूर्ण और समृद्ध राष्ट्र की कल्पना अधूरी है उक्त बातें आज यहां अंतरराष्ट्रीय वैदिक रामायण एवं शोध संस्थान (तुलसी स्मारक भवन )अयोध्या में हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित संगोष्ठी,सम्मान समारोह व सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए श्रीमान अजय कांत सैनी अपर आयुक्त प्रशासन अयोध्या ने कही l विशिष्ट अतिथि के रूप मे संगोष्ठी का विधिवत दीप प्रचलन कर उद्घाटन करते हुए नगर सहायक आयुक्त ज्वाला प्रसाद यादव में अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी से ही हमारे देश का समग्र विकास सम्भव है, हिंदी के बिना देश की कोई पहचान नहीं है देश की अस्मिता की पहचान हिंदी से ही है,अब समय आ गया है जब हिंदी को देश की राष्ट्रभाषा घोषित किया जाए। भा.ज.पा.युवा नेता परमानंद मिश्रा मंडल अध्यक्ष मुकेश तिवारी ने कहा कि वर्तमान सरकार हिंदी को विशेष महत्व दे रही है इसी क्रम में यदि हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित कर दिया जाय तो देश में विकास की प्रक्रिया और तीव्र होगीl संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए समाज सेवी व मित्र मंच के प्रमुख शरद पाठक"बाबा" ने कहा कि हिंदी के बिना देश की कोई ठोस पहचान नहीं बन पाएगी और समृद्ध व सशक्त भारत की परिकल्पना अधूरी होगी,समाजसेवी सुरेश यादव ने कहा कि जितने भी समाजसेवी है सबको मिलकर महाअभियान के तहत हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए एकजुट होना होगा। उक्त अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत सुप्रसिद्ध कवि शैलेंद्र पांडेय"मासूम" के नेतृत्व में कवियों ने अपने काव्य पाठ द्वारा साहित्य प्रेमियों को आह्लादित किया जिसमें प्रमुख रूप से वंदना सिंह, अंतिमा तिवारी,मधु उपाध्याय,संतोष सिंह, कोमल कर्कश,सुनीता पाठक,विश्व विजय प्रताप सिंह,लक्ष्मी पांडेय आदि रहे। समारोह का संचालन करते हुए संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सम्राट अशोक मौर्य ने आये हुए समस्त अतिथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए अयोध्या में हिंदी की गतिविधियों को धार देने के लिए हिंदी भवन की विशेष आवश्यकता पर जोर दिया जिसके माध्यम से हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित कराने की मुहिम को विशेष बल मिलेगा l संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश कुमार सिंह "वत्स"ने कहा कि हिंदी के राष्ट्रभाषा बने बिना भारत देश गूंगे के समान है,संस्थान के संरक्षक मंडल सदस्य व "साहित्य सम्राट" पत्रिका के सह संपादक राम केर सिंह ने कहा कि हिन्दी को पूर्ण आत्मसात किए बिना देश की वास्तविक प्रगति असंभव है,जनमोर्चा के वरिष्ठ पत्रकार सूर्य नारायण सिंह ने कहा कि समारोह मे हम सभी को एक परिवार मानकर अपनी अपनी जिम्मेदारियां का सफल निर्वहन करना होगा । उक्त अवसर पर समारोह में लगभग सैकड़ो साहित्य प्रेमियों को समाज के विविध क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रमाण पत्र,अंग वस्त्र, प्रतीक चिन्ह आदि देकर सम्मानित किया गया l समारोह को संबोधित करने वालों में प्रमुख रूप से संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विंध्यवासिनी शरण पांडिया, वरिष्ठ समाजसेवी सावित्री मिश्रा,ओमप्रकाश सोनी, आचार्य स्कंद दास, सुमित्रानंदन यादव,प्रिया श्रीवास्तव,सरोज यादव, दीपचंद राही,मीना सिंह,लाल मनीष प्रताप सिंह, डा.चंद्रगुप्त मौर्य,उर्मिला मौर्य,आचार्य शशि मौर्य,डॉ.सम्राट श्री कृष्ण मन मोहन मौर्य,अनामिका सम्राट,राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार मौर्य,शशिकला मौर्य,बृजेश सेन,रेनू गुप्ता, नरेंद्र पाठक,प्रिया श्रीवास्तव, साध्वी मनीषा पांडेय,नीलम सिंह,आदि रहे l समारोह में प्रमुख रूप से उपस्थित रहने वाले साहित्य प्रेमियों में प्रमुख रूप से अधिवक्ता अशोक पांडेय,संतोष कुमार वर्मा,डॉ. अनुराधा मौर्य, संजय यादव,सी.ए.चक्रवर्ती मौर्य,सिद्धार्थ श्रीवास्तव, आलोक निगम,संतोष तिवारी,माधव राज सिंह, अजय श्रीवास्तव"अज्जू " बलराम मौर्य,डा. एस.पी. द्विवेदी,डा.सोनी शर्मा, अनिरुद्ध प्रसाद शुक्ला, रागिनी सिंह,मुजामिल फिदा हुसैन,रूबे प्रताप मौर्य आदि रहे l

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