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अपनी पीड़ा को, निगलती घूंट सा।
बांधकर अलकों को, शिव के जूट सा।।
*कौन है ये 'राधिका, सी!*
*लग रही जो 'साधिका' सी।।*
राजपथ की साधना है...
कर्म ही आराधना है....
*भोग ही, सब कुछ नहीं है !*
*'योग, के व्रत को सिखाती!!*
कर्म पथ पर अग्रसर है !
कौन इस जैसा प्रखर है ?
*लोकहित में -व्यथित जन को*
*'हारती, बाजी 'जिताती,।।*
न्याय नीति की- 'अंकनी, सी।
राजघर की 'नंदिनी, सी ।।
*मेला, के शब्दों में उतरी...*
*दिव्य 'वीणा वादिनी, सी!!*
लोकप्रियता, दक्षता वरदान है।
हम सभी को 'आप पर , अभिमान है।।
*ईश की 'ईशा, हैं या शासन की मंशा ?*
*या कोई 'अनुराग उलझी, रागनी सी?*
साभार -
*डा .मेला*
(न्यूज़ एडिटर)
रैपिड रूल अंबेडकर नगर

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