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पांच हजार मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल शिक्षामित्रों को बेमौत मरने को मजबूर कर रही है सरकार


 पांच हजार मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल शिक्षामित्रों को बेमौत मरने को मजबूर कर रही है सरकार 

सरकार द्वारा किया जा रहा है शिक्षामित्रों पर निरंकुश,अन्याय पूर्ण,सौतेला व्यवहार 

आठ वर्षों से नहीं बढ़ा शिक्षामित्रों का मानदेय,वर्षों पूर्व मूल विद्यालय वापसी की शुरू हुई प्रक्रिया नहीं हुई पूरी 

अम्बेडकर नगर। शिक्षामित्र शिक्षक संघ अम्बेडकर नगर के जिलाध्यक्ष व शिक्षामित्र केयर समिति अम्बेडकर नगर के जिला संयोजक राम चन्दर मौर्य ने कहा कि मात्र पांच हजार रुपए मानदेय में शिक्षामित्रों द्वारा अपना परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि जनवरी माह में शिक्षामित्रों को 15 दिन का मात्र पांच हजार रुपए मानदेय देकर सरकार द्धारा शिक्षामित्रों को बेमौत मरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के साथ निरंकुशता, अन्याय पूर्ण व सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। शिक्षामित्र उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 26 वर्षों से कार्यरत हैं। शिक्षामित्र शिक्षक की सभी योग्यता को पूरा करते हैं और नियमित शिक्षकों के बराबर काम करते हैं। जनवरी माह में पांच हजार रुपए मानदेय देकर शिक्षामित्रों को आर्थिक तंगी से मरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। वहीं मानदेय भुगतान को लेकर भी लेट लतीफी की जाती है । जहां नियमित शिक्षकों का वेतन महीने के शुरूआत में ही दे दिया जाता है वहीं शिक्षामित्रों का मानदेय महीने के दूसरे व तीसरे सप्ताह में भुगतान किया जाता है। अल्प मानदेय वह भी समय से न मिलने के कारण शिक्षामित्रों को अपना परिवार चलाना मुश्किल हो जाता है। जिलाध्यक्ष, जिला संयोजक राम चन्दर मौर्य ने कहा कि आठ वर्षों में सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के मानदेय में एक भी रूपए की मानदेय वृद्धि नहीं की गई। कमरतोड़ बढ़ती मंहगाई में आर्थिक तंगी, अवसाद,व बीमारी के चलते हजारों शिक्षामित्रों के मौत के बाद भी सरकार द्वारा शिक्षामित्रों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यहां तक कि हजारों शिक्षामित्रों की मौत पर सरकार द्वारा संवेदना के दो शब्द भी नहीं बोले गए। शिक्षामित्रों पर सरकार द्वारा दिया गया सबका साथ सबका विकास का नारा पूरी तरह से फेल होता हुआ दिखाई दे रहा है। क्या यही रामराज्य की परिकल्पना है कि शिक्षामित्र को अल्प मानदेय देकर भूख से मरने को मजबूर किया जाय। फिर उन्हें कैशलेश इलाज की व्यस्था की बात कही जाय। शिक्षामित्रों के हर मुद्दे पर सरकार पूरी तरह फेल होती नजर आ रही है। शिक्षामित्र अल्प मानदेय में भी लम्बी दूरी तय कर विद्यालय जा रहे हैं। एक वर्ष पूर्व हुए शिक्षामित्रों के मूल विद्यालय वापसी का शासनादेश अभी तक पूरा नहीं हो सका। जिलाध्यक्ष जिला संयोजक राम चन्दर मौर्य ने कहा कि सरकार शिक्षामित्रों को नियमित कर शिक्षामित्रों की आर्थिक समस्या का समाधान करें। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों में अल्प मानदेय को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है।

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