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ग्राम पंचायत रूढ़ी के उत्तरी पश्चिमी सीमा पर कियरवा तालाब में बिना पत्थर गाड़े ही पत्थर लगाएं जाने की लेखपाल सलीम ने भेजी झूठी रिपोर्ट,तीन ग्राम प्रधानों व प्रतिनिधियों ने कर दी झूठी गवाही

 


*ग्राम पंचायत रूढ़ी के उत्तरी पश्चिमी सीमा पर कियरवा तालाब में बिना पत्थर गाड़े ही पत्थर लगाएं जाने की लेखपाल सलीम ने भेजी झूठी रिपोर्ट,तीन ग्राम प्रधानों व प्रतिनिधियों ने कर दी झूठी गवाही*



निराला साहित्य संवाद,

अम्बेडकर नगर। ग्राम सभा रूढ़ी में  खतौनी धारक मिथिलेश कुमार पुत्र राम शंकर निवासी अखलास पुर द्वारा उपजिलाधिकारी तहसील आलापुर अम्बेडकर नगर के दिनांक 30 दिसंबर 2025 को दिये गये आवेदन पत्र पर ग्राम सभा रूढ़ी में खतौनी की जमीन की पैमाइश करने राजस्व टीम शनिवार 25 अप्रैल को सायं पांच बजे पहुंची। पैमाइश करने वाली राजस्व टीम में नायब तहसीलदार, कानून गो और एक अन्य क्षेत्र में कार्यरत लेखपाल सहित तीन राजस्व कर्मचारी अधिकारी दिनांक 25 अप्रैल 2026 को खतौनी की जमीन की पैमाइश करने पहुंचे।टीम में ग्राम सभा रूढ़ी में तैनात लेखपाल मौजूद नहीं थे। नोटिस पर पूर्व सूचना के अनुसार अगल बगल के अन्य काश्तकार व ग्रामीण मौजूद रहे। मौके पर पैमाइश करने वाली राजस्व टीम द्वारा पैमाइश नाप जोख हेतु ग्राम सभा रूढ़ी के उत्तरी पश्चिमी सीमा पर कियरवा तालाब में लगा सीमांकन पत्थर गाड़ा ही नहीं गया था वहीं ग्राम सभा रूढ़ी के पूर्व लेखपाल सलीम द्वारा आंकड़े से बिना नाप जोख पत्थर खड़ा कर सम्बन्धित ग्राम पंचायत के तीन ग्राम प्रधानों व प्रतिनिधियों, लेखपाल के साथ  फोटो खिंचवा कर झूठी गवाही दी गई कि सीमांकन पत्थर गाड़ा गया। तथा झूठी रिपोर्ट लगाने में माहिर लेखपाल सलीम द्वारा प्रशासन को सीमांकन पत्थर लगायें जाने की झूठी रिपोर्ट भी भेज दिया। आवेदन पत्र पर दिनांक 25 अप्रैल 2026 को पैमाइश हेतु पहुची राजस्व टीम व ग्रामीणो द्वारा नाप, जोख, पैमाइश हेतु जब सीमांकन पत्थर के पास पहुंचने पर पाया गया कि पूर्व लेखपाल सलीम द्वारा पत्थर लगवाया ही नहीं गया। लेखपाल सलीम द्वारा पत्थर खड़ा कर फोटो खींचकर सीमांकन पत्थर लगाएं जाने की फर्जी रिपोर्ट भेजकर प्रसाशन और उच्च अधिकारियों को गुमराह करने का काम किया गया। पैमाइश करने पहुंची राजस्व टीम को पत्थर गाड़े गए स्थिति में न पाए जाने की स्थिति में सीमांकन पत्थर न गड़े होने पर विवाद की स्थिति में बिना नाप जोख किये खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। हैरानी की बात तो यह है कि पैमाइश करने पहुंची राजस्व टीम द्वारा बिना गड़े पत्थर को ही सही मानते हुए पैमाइश करने का दबाव बनाने व ग्रामीणों पर रौब झाड़ने का काम किया गया।इस राजस्व टीम के बिगड़े बोल भी ग्रामीणों को सुनने को मिला राजस्व टीम द्वारा ग्रामीणों के बीच में गैर जिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा कि यह हमारी जिम्मेदारी सीमांकन के पत्थर गाड़ना नहीं है।सवाल यह उठता है कि जब इस जिम्मेदार राजस्व टीम की जिम्मेदारी सीमांकन पत्थर गाड़ना नहीं है तो क्या सरकार इन्हें काश्तकारों और ग्रामीणों पर अनावश्यक दबाव बनाने व ग्रामीणों पर अधिकारी कर्मचारी होने का रौब झाड़ने के लिए मोटी रकम वेतन के रूप में देती है। सीमांकन पत्थर न गड़े होने का विवाद गहराने की स्थिति में राजस्व टीम को मजबूर होकर बिना पैमाइश वापस लौटना पड़ा।बताते चलें की पूर्व तैनात लेखपाल सलीम द्वारा 27 अप्रैल 2025 को रात्रि में अपराह्न लगभग 9 बजे रात को सीमांकन पत्थर लगायें जाने का प्रयास किया गया था। जानकारी होने पर रात्रि में पत्थर लगाएं जाने का ग्रामीणों द्वारा विरोध करने पर लेखपाल सलीम द्वारा दूसरे दिन 28 अप्रैल 2025 को तीन सम्बन्धित ग्राम प्रधानों, प्रतिनिधियों के साथ बिना सीमांकन पत्थर गाड़े, पत्थर खड़ा कर के फोटो खींचकर सीमांकन पत्थर लगायें जाने की पूरी तरह से फर्जी व भ्रामक सूचना भेजकर जिला प्रशासन व उच्च अधिकारियों को गुमराह करने का काम किया गया।जिसका खुलासा पैमाइश करने  राजस्व टीम के पहुंचने पर हुई। मजे की बात तो यह है कि जिनके कंधों पर ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी ग्रामीणों ने सौंपी वह ग्राम प्रधान व प्रतिनिधि भी सीमांकन पत्थर गाड़ने की झूठी गवाही करने व साक्ष्य के तौर पर फोटो खिंचवाने में पीछे नहीं रहें। ग्राम प्रधानों व प्रतिनिधियों द्वारा सीमांकन पत्थर पर बिना पत्थर गाड़े झूठी गवाही देने व लेखपाल सलीम द्वारा सीमांकन पत्थर गाड़े जाने की झूठी रिपोर्ट शाशन प्रशासन को झूठी रिपोर्ट भेजने को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी व्यक्त किया। सीमांकन पत्थर न गड़ा होने की स्थिति में ग्राम पंचायतों के सीमांकन को लेकर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है साथ ही लेखपाल सहित समस्त सम्बन्धित अधिकारियों की कार्यशैली पर बड़ा सवाल भी खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों ने राजस्व टीम से सही स्थान पर सीमांकन पत्थर लगाये जाने की मांग किया। अब देखना यह कि राजस्व टीम द्वारा सही स्थान पर कब सीमांकन पत्थर लगवाया जाता है।

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